भारत के ग्रामीण विकास और नीतिगत परिदृश्य में 1 जुलाई, 2026 से एक नए युग की शुरुआत हो चुकी है। केंद्र सरकार ने दो दशक पुराने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को पूरी तरह से विस्थापित करते हुए एक नया और आधुनिक वैधानिक ढांचा लागू किया है, जिसे VB-G RAM G (विकसित भारत – रोजगार और आजीविका मिशन – ग्रामीण अधिनियम) नाम दिया गया है।
संसद द्वारा दिसंबर 2025 में पारित होने के बाद, इस कानून को जमीनी स्तर पर उतार दिया गया है। यह लेख इस नई प्रणाली, इसकी कार्यप्रणाली, इसके तकनीकी ढांचे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसके दूरगामी प्रभावों का एक व्यापक और विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
VB-G RAM G: पृष्ठभूमि और विजन
मनरेगा ने पिछले वर्षों में ग्रामीण भारत को एक बड़ा सुरक्षा जाल प्रदान किया था, लेकिन समय के साथ उसमें कई प्रशासनिक कमियां, तकनीकी पिछड़ापन और ‘टिकाऊ संपत्तियों’ (Durable Assets) के निर्माण की कमी जैसी चुनौतियां देखी गईं। इन सीमाओं को दूर करने और वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए इस नए अधिनियम को तैयार किया गया है।
यह मिशन केवल संकट के समय रोजगार देने वाली एक कल्याणकारी योजना नहीं है। इसका मुख्य विजन ग्रामीण श्रमशक्ति का उपयोग करके गांवों में ऐसा आर्थिक बुनियादी ढांचा तैयार करना है जो आने वाले समय में शहरों पर निर्भरता को कम कर सके और स्थानीय स्तर पर आत्मनिर्भरता बढ़ा सके।
मुख्य विशेषताएं: मनरेगा और VB-G RAM G में अंतर
इस नए कानून के तहत ग्रामीण श्रमिकों के अधिकारों, कार्य की प्रकृति और वित्तीय प्रबंधन में व्यापक सुधार किए गए हैं। नीचे दी गई तालिका दोनों व्यवस्थाओं के अंतर को स्पष्ट करती है:
| नीतिगत घटक | मनरेगा (पुरानी व्यवस्था) | VB-G RAM G (नवेली व्यवस्था) |
|---|---|---|
| गारंटीकृत कार्य दिवस | प्रति परिवार न्यूनतम 100 दिन | प्रति परिवार न्यूनतम 125 दिन |
| न्यूनतम राष्ट्रीय मजदूरी | राज्यों के आधार पर भिन्न (औसत ₹298.80) | न्यूनतम ₹300 निर्धारित (राष्ट्रीय औसत बढ़कर ₹327.40) |
| कृषि सीजन के नियम | वर्ष भर निरंतर कार्य की मांग का नियम | 60 दिनों का वैधानिक कृषि अवकाश (बुवाई और कटाई के समय) |
| प्रशासनिक बजट | कुल बजटीय आवंटन का 6% | कुल बजटीय आवंटन का 9% (तकनीकी सुधार हेतु) |
| फंडिंग का ढांचा | अधिकांश वित्तीय भार केंद्र सरकार पर | 60:40 (सामान्य राज्य) और 90:10 (पहाड़ी/पूर्वोत्तर राज्य) |
| संपत्ति निर्माण का लक्ष्य | अल्पकालिक या अस्थायी कार्य | अनिवार्य दीर्घकालिक और उत्पादक संपत्तियां |
बुनियादी ढांचे के चार प्रमुख स्तंभ (Verticals)
VB-G RAM G के तहत होने वाले सभी कार्यों को चार मुख्य श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्रामीण श्रम से जो भी निर्माण हो, वह उत्पादक और स्थायी हो:
1. जल सुरक्षा (Water Security)
इसके अंतर्गत जल संकट से निपटने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है। परंपरागत तालाबों के जीर्णोद्धार के साथ-साथ जियो-टैग्ड चेक डैम का निर्माण, जल संचयन प्रणालियां (Water Harvesting) और भूजल स्तर को सुधारने के लिए रीचार्ज कुओं का निर्माण अनिवार्य किया गया है।
2. कोर-ग्रामीण बुनियादी ढांचा (Core-Rural Infrastructure)
गांवों की आंतरिक सड़कों को बारहमासी संपर्क मार्गों से जोड़ना, जल निकासी (Drainage) प्रणालियों का आधुनिकीकरण और ग्राम पंचायतों के लिए डिजिटल सेवा केंद्रों के भवनों का निर्माण इस स्तंभ का हिस्सा है।
3. आजीविका से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर (Livelihood Infrastructure)
यह इस अधिनियम का सबसे महत्वपूर्ण नया हिस्सा है। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की आय बढ़ाने के लिए स्थानीय स्तर पर छोटे कोल्ड स्टोरेज, अनाज भंडारण गृह (Warehouses), और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के लिए कार्यशालाओं का निर्माण इसी श्रेणी के तहत किया जा रहा है।
4. जलवायु अनुकूलन कार्य (Climate Mitigation Works)
बदलते मौसम चक्र को देखते हुए बड़े पैमाने पर वनीकरण (Afforestation), बंजर भूमि का उद्धार और मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए विशेष बांधों का निर्माण किया जा रहा है ताकि ग्रामीण क्षेत्र प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अधिक लचीले बन सकें।
तकनीकी ढांचा और कार्यप्रणाली
VB-G RAM G पूरी तरह से एक डेटा-संचालित और पारदर्शी व्यवस्था पर आधारित है। इसकी तकनीकी कार्यप्रणाली के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:
- ‘Planner’ सॉफ्टवेयर और विकेंद्रीकरण: अब कार्यों की रूपरेखा ऊपर से तय नहीं होती। ग्राम पंचायतें अपनी आवश्यकताओं के अनुसार प्रस्ताव तैयार करती हैं और उन्हें ‘Planner’ सॉफ्टवेयर पर अपलोड करती हैं।
- भू-स्थानिक एकीकरण (Geospatial Integration): सभी प्रस्तावित कार्यों को ‘पीएम गति शक्ति’ और ‘युक्तधारा’ पोर्टल के साथ मैप किया जाता है। इससे यह जांचना आसान हो जाता है कि एक ही स्थान पर दो बार काम न हो और भ्रष्टाचार पर लगाम लगे।
- एआई-आधारित निगरानी: कार्यस्थल पर श्रमिकों की उपस्थिति और काम की प्रगति को जीपीएस-सक्षम कैमरों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित प्रणालियों के माध्यम से सत्यापित किया जाता है।
- आधार-लिंक्ड डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT): श्रमिकों के वेतन का भुगतान सीधे उनके आधार से जुड़े बैंक खातों में 15 दिनों के भीतर स्थानांतरित कर दिया जाता है।
- आवेदक भारत का नागरिक होना चाहिए और उसकी आयु 18 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए।
- आवेदक को किसी ग्रामीण क्षेत्र का स्थानीय निवासी होना अनिवार्य है।
- वह अकुशल शारीरिक श्रम (Unskilled Manual Work) करने के लिए तैयार और इच्छुक होना चाहिए।
- आधार कार्ड (पहचान और बैंक खाते से लिंक करने के लिए)
- निवास प्रमाण पत्र (ग्राम पंचायत के भीतर का पता सत्यापित करने के लिए)
- बैंक खाता विवरण (DBT के माध्यम से सीधे भुगतान के लिए पासबुक की प्रति)
- पासपोर्ट साइज फोटो (डिजिटल जॉब कार्ड के लिए)
इन दस्तावेजों के साथ ग्राम पंचायत कार्यालय या स्थानीय कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से पंजीकरण कराया जा सकता है, जिसके बाद एक विशिष्ट डिजिटल जॉब कार्ड जारी किया जाता है।
वर्तमान परिदृश्य और आर्थिक प्रासंगिकता
वित्तीय वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में इस योजना के लिए ₹95,692 करोड़ का आवंटन किया गया है। राज्यों के 40% हिस्से को मिलाने के बाद इस योजना का कुल वास्तविक वार्षिक बजट लगभग ₹1,51,282 करोड़ तक पहुंच जाता है।
2 जुलाई, 2026 को आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले से देशव्यापी औपचारिक लॉन्च के साथ ही इस योजना के तहत नए डिजिटल जॉब कार्ड्स का वितरण शुरू हो चुका है। वर्तमान आर्थिक परिदृश्य में यह योजना तीन प्रमुख कारणों से अत्यंत प्रासंगिक है:
- कृषि और श्रम का संतुलन: 60 दिनों का वैधानिक कृषि अवकाश यह सुनिश्चित करता है कि जब खेतों में बुवाई या कटाई का मुख्य समय हो, तब किसानों को मजदूरों की कमी का सामना न करना पड़े।
- ग्रामीण उपभोग (Rural Consumption) में वृद्धि: गारंटीकृत 125 दिनों के रोजगार और न्यूनतम ₹300 की दिहाड़ी से ग्रामीण परिवारों की क्रय शक्ति में सुधार होगा, जो सीधे तौर पर देश की जीडीपी को गति देगा।
- रिवर्स माइग्रेशन का प्रबंधन: गांवों में ही बेहतर बुनियादी ढांचा और आजीविका के साधन मिलने से शहरों की ओर होने वाले अनियंत्रित पलायन में कमी आएगी।
चुनौतियां और आगे की राह
यद्यपि VB-G RAM G एक अत्यंत प्रगतिशील कानून है, लेकिन इसके पूर्ण कार्यान्वयन में कुछ चुनौतियां भी शामिल हैं। केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 के फंडिंग अनुपात के कारण आर्थिक रूप से कमजोर राज्यों पर वित्तीय दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा, गहरे ग्रामीण क्षेत्रों में पूरी तरह से डिजिटल और एआई-आधारित प्रणालियों को अपनाने के लिए जमीनी स्तर पर तकनीकी साक्षरता को बढ़ाना होगा।
In चुनौतियों के बावजूद, प्रशासनिक खर्च की सीमा को 6% से बढ़ाकर 9% करना यह दर्शाता है कि सरकार प्रखंड (Block) और पंचायत स्तर पर तकनीकी क्षमता को मजबूत करने के लिए गंभीर है। यदि इसे सही भावना के साथ लागू किया गया, तो यह अधिनियम भारत के ग्रामीण भूगोल और अर्थव्यवस्था दोनों को बदलने की क्षमता रखता है।

