- 1 अर्थव्यवस्था: RBI का पॉलीमर (प्लास्टिक) करेंसी निर्णय
- 2 अंतर्राष्ट्रीय संबंध: IIT मद्रास जंजीबार कैम्पस का मास्टर प्लान
- 3 विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: ‘UNNATI AI 2.0’ पहल
- 4 पर्यावरण एवं खनन: ‘AAROH’ रिपोर्ट और Coal NEER प्रोजेक्ट
- 5 कृषि एवं हरित वित्त: NABARD और MAHAPREIT का समझौता
- 6 रक्षा प्रौद्योगिकी: DRDO का ‘प्रोजेक्ट कुशा’ (LRSAM)
- 7 कौशल विकास एवं शासन: NCVET और NIRDPR की साझेदारी
- 8 कृषि एवं व्यापार: कॉटन (कपास) पर केंद्रीय फैक्टशीट
- 9 वैश्विक सूचकांक व रिपोर्ट: UN की भुखमरी रिपोर्ट (SOFI 2026)
- 10 खेल समाचार: राष्ट्रमंडल खेल 2026 (Glasgow CWG)
1. RBI का पॉलीमर (प्लास्टिक) करेंसी लाने का निर्णय
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की सहायक इकाई भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) ने उन्नत सुरक्षा सुविधाओं वाले BOPP (Biaxially Oriented Polypropylene) पॉलीमर सबस्ट्रेट आधारित बैंक नोटों की आपूर्ति के लिए वैश्विक रुचि की अभिव्यक्ति (EOI) आमंत्रित की है। प्राथमिक चरण में ₹10 और ₹20 मूल्यवर्ग के कागजी नोटों के स्थान पर पॉलीमर आधारित प्लास्टिक नोट पेश करने की योजना है।
📜 ऐतिहासिक पृष्ठभूमिविश्व में सर्वप्रथम 1988 में ऑस्ट्रेलिया ने पॉलीमर बैंक नोट जारी किए थे। भारत में, RBI ने 2009-10 में पहली बार देश के 5 चुनिंदा शहरों (कोच्चि, मैसूर, जयपुर, शिमला और भुवनेश्वर) में ₹10 के 1 अरब पॉलीमर नोटों का फील्ड ट्रायल करने का निर्णय लिया था। कागजी नोटों की सीमित आयु और गंदे नोटों को बदलने की भारी लागत को देखते हुए यह कदम उठाया जा रहा है।
🌍 समसामयिक प्रासंगिकताभारत में छोटे मूल्यवर्ग के कॉटन-पेपर नोट तेज़ी से खराब हो जाते हैं। पॉलीमर नोट पानी, गंदगी और नमी के प्रति प्रतिरोधी होते हैं। यह कदम RBI की ‘क्लीन नोट पॉलिसी’ को मजबूती देगा और नोटों के पुनर्मुद्रण (re-printing) तथा निपटान की वार्षिक लागत को काफी हद तक कम करेगा।
- UPSC Prelims/Mains: RBI अधिनियम 1934 की धारा 22 (नोट निर्गमन एकाधिकार), मुद्रा प्रबंधन लागत और डिजिटल ई-रुपया (e-Rupee) के साथ इसका संबंध।
- Banking & SSC: BRBNMPL की स्थापना (1995), मुख्यालय (बेंगलुरु), प्रेस स्थान (मैसूर और सालबोनी)।
| पैरामीटर | विवरण / आंकड़े |
|---|---|
| नोट सबस्ट्रेट सामग्री | BOPP (Biaxially Oriented Polypropylene) |
| पॉलीमर नोटों की जीवन अवधि | कॉटन-पेपर की तुलना में 2.5 से 4 गुना अधिक |
| वार्षिक मुद्रा प्रबंधन लागत | लगभग ₹5,000 करोड़ (RBI) |
| प्रस्तावित मूल्यवर्ग | ₹10 एवं ₹20 |
2. IIT मद्रास जंजीबार कैम्पस का मास्टर प्लान
तंजानिया के जंजीबार के राष्ट्रपति डॉ. हुसैन अली म्विनी की भारत यात्रा के दौरान फुम्बा प्रायद्वीप (Fumba Peninsula), जंजीबार में 200 एकड़ में फैले IIT मद्रास जंजीबार परिसर के व्यापक मास्टर प्लान का अनावरण किया गया। यह किसी भी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) का पहला विदेशी परिसर (First International IIT Campus) है।
📜 ऐतिहासिक पृष्ठभूमिराष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 में भारतीय शिक्षा प्रणाली के अंतर्राष्ट्रीयकरण का रोडमैप तैयार किया गया था। जुलाई 2023 में भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय, IIT मद्रास और जंजीबार के शिक्षा मंत्रालय के बीच समझौता हुआ था। नवंबर 2023 से यहाँ शैक्षणिक सत्र शुरू हुआ, जिसकी पहली महिला निदेशक प्रो. प्रीति अघालसम बनीं।
🌍 समसामयिक प्रासंगिकतायह पहल भारत की ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) नेतृत्व रणनीति और ‘साउथ-साउथ कोऑपरेशन’ का प्रमुख उदाहरण है। शिक्षा कूटनीति के माध्यम से अफ़्रीकी महाद्वीप में भारत के प्रभाव में वृद्धि होगी और डेटा साइंस व एआई जैसे उन्नत विषयों में स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण मिलेगा।
- UPSC GS-2: भारत-अफ्रीका संबंध, शिक्षा का अंतर्राष्ट्रीयकरण, NEP 2020 के प्रावधान।
- SSC/State PCS: प्रथम विदेशी IIT परिसर (जंजीबार, तंजानिया), पहली महिला निदेशक (प्रो. प्रीति अघालसम)।
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| स्थान एवं क्षेत्रफल | फुम्बा प्रायद्वीप, जंजीबार (200 एकड़) |
| संबद्ध IIT संस्थान | IIT मद्रास (IIT Madras) |
| कैम्पस की पहली निदेशक | प्रो. प्रीति अघालसम (Prof. Preeti Aghalayam) |
| तंजानिया की राजधानी एवं मुद्रा | डोडोमा (Dodoma) / तंजानियाई शिलिंग |
3. ‘UNNATI AI 2.0’ पहल का शुभारंभ
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने राष्ट्रीय ‘IndiaAI’ मिशन के तहत UNNATI AI 2.0 (Universal Network for Nurturing Artificial Intelligence Talent & Innovation) पहल की शुरुआत की। इसका उद्देश्य टियर-2 और टियर-3 शहरों में AI टैलेंट विकसित करना और स्थानीय स्टार्टअप्स को कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदान करना है।
📜 ऐतिहासिक पृष्ठभूमिमार्च 2024 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹10,372 करोड़ के वित्तीय परिव्यय के साथ राष्ट्रीय IndiaAI Mission की मंजूरी दी थी। UNNATI 1.0 के तहत केंद्रीय स्तर पर AI कंप्यूटिंग ग्रिड विकसित की गई थी। UNNATI 2.0 इस क्षमता का छोटे शहरों में विस्तार करता है।
🌍 समसामयिक प्रासंगिकतातकनीकी विकास को केवल बड़े शहरों (बेंगलुरु, हैदराबाद) तक सीमित रखने के बजाय टियर-2/3 शहरों के छात्रों को AI क्रांति से जोड़ना। यह पहल ‘भाषिणी’ (Bhashini) परियोजना के साथ मिलकर भारतीय भाषाओं में AI मॉडल विकसित करने में मदद करेगी।
- UPSC GS-3: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का समावेशी विकास और IndiaAI मिशन के 7 स्तम्भ।
- Banking & SSC: MeitY के प्रमुख डिजिटल कार्यक्रम, कंप्यूट क्षमता (10,000+ GPUs)।
| घटक | विवरण / लक्ष्य |
|---|---|
| नोडल मंत्रालय | इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) |
| IndiaAI मिशन बजट | ₹10,372 करोड़ |
| लक्षित संस्थान | टियर-2/3 शहरों के 500+ तकनीकी संस्थान |
| कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर लक्ष्य | 10,000+ GPU (Graphics Processing Units) |
4. ‘AAROH’ रिपोर्ट और Coal NEER प्रोजेक्ट
कोयला मंत्रालय ने बंद कोयला खदानों के वैज्ञानिक समापन और पारिस्थितिक बहाली के लिए ‘AAROH: Annual Report on Mine Closure and Ecological Restoration’ जारी की। साथ ही Coal India Limited (CIL) ने ‘Coal NEER’ पहल के तहत खदानों के पानी को उपचारित कर ग्रामीणों को आपूर्ति करने के संयंत्रों का विस्तार किया।
📜 ऐतिहासिक पृष्ठभूमिभारत में 1973 में कोयला खदानों का राष्ट्रीयकरण हुआ। 2009 में ‘माइन क्लोजर गाइडलाइंस’ अनिवार्य किए गए थे। भारत के ‘पंचामृत’ संकल्पों (2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन) के तहत खनन गतिविधियों के बाद भूमि की मूल स्थिति में वापसी अनिवार्य है।
🌍 समसामयिक प्रासंगिकता‘Coal NEER’ के जरिए लाखों लीटर खदान जल का शोधन कर सिंचाई और पेयजल के लिए दिया जा रहा है। ‘AAROH’ रिपोर्ट खनन से प्रभावित क्षेत्रों में **’जस्ट ट्रांजिशन’ (Just Transition)** सुनिश्चित करने का ढांचा पेश करती है।
- UPSC GS-3: सतत खनन (Sustainable Mining), पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA)।
- SSC/Railway: कोल इंडिया लिमिटेड (CIL – महारत्न कंपनी, 1975), AAROH रिपोर्ट जारीकर्ता मंत्रालय।
| सूचक | विवरण |
|---|---|
| उपचारित खदान जल (Coal NEER) | वार्षिक 400+ मिलियन क्यूसेक लीटर |
| पारिस्थितिक पुनर्वास क्षेत्र | 10,000+ हेक्टेयर जैविक रूप से बहाल भूमि |
| कोल इंडिया लिमिटेड का दर्जा | महारत्न पीएसयू (Coal India Limited) |
5. NABARD और MAHAPREIT का समझौता
राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) ने महाराष्ट्र सरकार के उपक्रम MAHAPREIT के साथ समझौता (MoU) किया। इसके तहत बायो-सीएनजी, सौर-संचालित माइक्रो कोल्ड स्टोरेज और एग्रो-वेस्ट प्रोसेसिंग परियोजनाओं के लिए रियायती हरित वित्त पोषण (Green Financing) दिया जाएगा।
📜 ऐतिहासिक पृष्ठभूमिNABARD की स्थापना 12 जुलाई 1982 को बी. शिवरामन समिति की सिफारिश पर हुई थी। सरकार का SATAT अभियान 2018 में शुरू हुआ था, जिसका उद्देश्य कृषि अवशेषों से 5,000 कंप्रेस्ड बायो-गैस (CBG) प्लांट लगाना है।
🌍 समसामयिक प्रासंगिकतापराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण को रोकने के लिए एग्रो-वेस्ट से बायो-सीएनजी बनाना एक बेहतरीन विकल्प है। सौर-संचालित कोल्ड स्टोरेज दूरदराज के गांवों में फसलों के नुकसान (Post-Harvest Losses) को काफी कम करेंगे।
- Banking Exams: NABARD का स्वामित्व (100% भारत सरकार), RIDF कोष, प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र ऋण (PSL)।
- UPSC GS-3: सर्कुलर इकोनॉमी (Circular Economy) और एग्री-इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड।
| मापदंड | विवरण |
|---|---|
| NABARD की स्थापना | 12 जुलाई 1982 (शिवरामन समिति) |
| साझेदार संस्था | MAHAPREIT (महाराष्ट्र सरकार) |
| बायो-सीएनजी में मुख्य घटक | मीथेन (Methane – CH4 > 90%) |
| लक्षित इकाइयां | 200+ एग्रो-सोलर कोल्ड स्टोर एवं 50 CBG प्लांट |
6. DRDO का ‘प्रोजेक्ट कुशा’ (LRSAM Flight Test)
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (LRSAM) प्रणाली ‘प्रोजेक्ट कुशा’ का सफल परीक्षण पूरा किया। यह मिसाइल दुश्मन के जेट्स, ड्रोनों और बैलिस्टिक मिसाइलों को 350 किमी दूर ही नष्ट करने में सक्षम है।
📜 ऐतिहासिक पृष्ठभूमिप्रोजेक्ट कुशा को 2022 में मंजूरी दी गई थी। इसे भारत का अपना ‘S-400’ या ‘आयरन डोम’ विकल्प माना जा रहा है। DRDO (स्थापना: 1958) ने इससे पहले आकाश, MRSAM और QRSAM प्रणालियां तैयार की हैं।
🌍 समसामयिक प्रासंगिकतासीमाओं पर बढ़ते हवाई खतरों के बीच त्रि-स्तरीय लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली देश की सुरक्षा के लिए जरूरी है। यह प्रणाली भारत को विदेशी रक्षा आयात पर निर्भरता खत्म करने में मदद करेगी।
- UPSC GS-3: भारत की वायु रक्षा अवसंरचना और स्टील्थ मिसाइल रोधी क्षमता।
- SSC/Railway: DRDO का मुख्यालय (नई दिल्ली), मोटो (“बलस्य मूलं विज्ञानम्”), प्रोजेक्ट कुशा की रेंज (350 किमी)।
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| परियोजना का नाम | प्रोजेक्ट कुशा (Project Kusha – LRSAM) |
| अधिकतम मारक क्षमता | 350 किलोमीटर |
| विकासकर्ता एजेंसी | DRDO (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) |
| लक्ष्य क्षमता | स्टील्थ जेट, क्रूज/बैलिस्टिक मिसाइल, UAVs |
7. NCVET और NIRDPR की साझेदारी
राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण परिषद (NCVET) ने ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत संस्थान **NIRDPR (National Institute of Rural Development and Panchayati Raj)** को एक ‘अवार्डिंग बॉडी (Dual Category)’ के रूप में मान्यता प्रदान की है।
📜 ऐतिहासिक पृष्ठभूमिNCVET की स्थापना 2018 में कौशल विकास मंत्रालय (MSDE) के तहत व्यावसायिक शिक्षा के विनियामक के रूप में की गई थी। NIRDPR (स्थापना: 1958, मुख्यालय: हैदराबाद) ग्रामीण विकास और पंचायती राज पर शोध का शीर्ष संस्थान है।
🌍 समसामयिक प्रासंगिकताग्रामीण युवाओं और महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को ‘लखपति दीदी’ योजना के तहत मिलने वाले प्रशिक्षण को अब राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा (NSQF) के तहत मान्यता प्राप्त प्रमाण पत्र दिए जा सकेंगे।
- UPSC GS-2: ग्रामीण विकास, पंचायती राज संस्थाएं (73वां संशोधन), कौशल भारत योजनाएं।
- SSC/State PCS: NIRDPR का मुख्यालय (हैदराबाद), NCVET की भूमिका।
| संस्थान | विवरण |
|---|---|
| NIRDPR का मुख्यालय | हैदराबाद, तेलंगाना |
| संबंधित केंद्रीय मंत्रालय | ग्रामीण विकास मंत्रालय (Ministry of Rural Development) |
| NCVET का नोडल मंत्रालय | कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) |
8. कॉटन (कपास) पर केंद्रीय फैक्टशीट
केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय ने भारतीय कपास क्षेत्र पर एक फैक्टशीट जारी की, जिसमें कपास को भारत का **”व्हाइट गोल्ड” (White Gold)** बताया गया। आंकड़ों के अनुसार, भारतीय कपास कपड़ों के निर्यात में USA (26.35%) सबसे बड़ा बाजार है, जबकि बांग्लादेश दूसरे स्थान पर है।
📜 ऐतिहासिक पृष्ठभूमिभारत में कपास की खेती सिंधु घाटी सभ्यता से हो रही है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा कपास उत्पादक है। 2020 में भारत सरकार ने **”कस्तूरी कॉटन भारत” (Kasturi Cotton India)** ब्रांड नाम से प्रीमियम कॉटन लॉन्च किया था।
🌍 समसामयिक प्रासंगिकताकपड़ा उद्योग कृषि के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा रोजगार दाता है। लगभग 60 लाख किसान और 4.5 करोड़ लोग इससे जुड़े हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में टिकाऊ (Sustainable) कपास की मांग तेजी से बढ़ रही है।
- UPSC Geography/GS-3: कपास की फसल की स्थितियां (काली मिट्टी, 21°C-30°C तापमान, 210 पाला-रहित दिन)।
- SSC/Banking/Railway: शीर्ष निर्यातक गंतव्य (USA – 26.35%), कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) का मुख्यालय (नवी मुंबई)।
| पैरामीटर | आंकड़ा / विवरण |
|---|---|
| शीर्ष निर्यातक बाजार (USA) | 26.35% हिस्सेदारी |
| द्वितीय निर्यातक बाजार (बांग्लादेश) | 19.81% हिस्सेदारी |
| संलग्न आजीविका | 60 लाख किसान + 4.5 करोड़ कार्यकर्ता |
| भारतीय प्रीमियम कॉटन ब्रांड | कस्तूरी कॉटन भारत (Kasturi Cotton India) |
9. UN की भुखमरी रिपोर्ट (SOFI 2026 / SDG 2)
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) द्वारा जारी ‘State of Food Security and Nutrition in the World (SOFI) 2026’ रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक भुखमरी की दर 2015 के 8.0% से घटकर 7.8% हो गई है, लेकिन 2030 तक ‘Zero Hunger’ पाना चुनौतीपूर्ण है।
📜 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि2015 में तय किए गए 17 सतत विकास लक्ष्यों में **SDG 2** का लक्ष्य 2030 तक भुखमरी को पूरी तरह समाप्त करना है। SOFI रिपोर्ट FAO, IFAD, UNICEF, WFP और WHO द्वारा संयुक्त रूप से प्रकाशित की जाती है।
🌍 समसामयिक प्रासंगिकताजलवायु संकट और युद्धों के कारण खाद्य सुरक्षा पर खतरा बना हुआ है। भारत की ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ (PMGKAY) को भुखमरी रोकने में एक प्रभावी सुरक्षा कवच माना जाता है।
- UPSC GS-2: खाद्य सुरक्षा, NFSA 2013, FAO और WFP की भूमिका।
- SSC/Banking: FAO का मुख्यालय (रोम, इटली), स्थापना (16 अक्टूबर 1945), SDG 2 का लक्ष्य।
| पैरामीटर | आंकड़े / विवरण |
|---|---|
| वर्तमान वैश्विक भुखमरी दर (2026) | 7.8% (लगभग 733 मिलियन लोग) |
| 2015 में भुखमरी दर | 8.0% |
| संबंधित सतत विकास लक्ष्य | SDG 2 (Zero Hunger) |
| FAO मुख्यालय एवं स्थापना | रोम (इटली) / 16 अक्टूबर 1945 |
10. राष्ट्रमंडल खेल 2026 (Glasgow CWG)
स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित होने वाले **राष्ट्रमंडल खेल 2026 (Glasgow CWG 2026)** के क्वालीफाइंग दौरों में भारतीय एथलीटों ने मुक्केबाजी, तैराकी और पैरा-पावरलिफ्टिंग में आधिकारिक कोटा हासिल किए।
📜 ऐतिहासिक पृष्ठभूमिप्रथम राष्ट्रमंडल खेल 1930 में हैमिल्टन (कनाडा) में हुए थे। भारत ने पहली बार 1934 (लंदन) राष्ट्रमंडल खेलों में भाग लिया। भारत ने 2010 में नई दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेलों की सफल मेजबानी की थी (101 पदक जीते थे)।
🌍 समसामयिक प्रासंगिकता‘खेलो इंडिया’ और TOPS (Target Olympic Podium Scheme) पहल से भारतीय एथलीटों और पैरा-खिलाड़ियों के प्रदर्शन में निरंतर सुधार आया है।
- SSC/Railway: CWG 2026 का आयोजक शहर (ग्लासगो, स्कॉटलैंड), प्रथम CWG (1930)।
- General Awareness: CWG 2022 का आयोजन स्थल (बर्मिंघम, यूके)।
| विवरण | तथ्य |
|---|---|
| CWG 2026 का आयोजन स्थल | ग्लासगो, स्कॉटलैंड (Glasgow, Scotland) |
| प्रथम राष्ट्रमंडल खेल | 1930 (हैमिल्टन, कनाडा) |
| भारत की सर्वाधिक सफल मेजबानी | 2010 (नई दिल्ली – 101 पदक) |
| CWG 2022 आयोजन स्थल | बर्मिंघम (ब्रिटेन) |
- 12 September 2026 Current Affairs in Hindi | UPSC, BPSC, SSC
- 12 September 2026 Current Affairs | UPSC, BPSC, SSC
- 11 September 2026 Current Affairs in Hindi | UPSC, BPSC, SSC
- 11 September 2026 Current Affairs: The Hindu & Indian Express | UPSC, BPSC, SSC
- 10 September 2026 Current Affairs | The Hindu & Indian Express | UPSC, BPSC, SSC
