समसामयिक घटनाक्रम (Current Affairs) व्यापक विश्लेषण
प्रतियोगिता परीक्षाओं (UPSC, State PSC, SSC, Bank) के लिए विशेष रूप से तैयार उत्कृष्ट अध्ययन सामग्री
विषय सूची (Table of Contents)
- वार्षिक सांस्कृतिक उत्सव: श्रद्धा और उत्साह (मणिपुर, असम, ओडिशा, नागालैंड)
- नेल्सन मंडेला अंतर्राष्ट्रीय दिवस 2026: “यह अभी भी हमारे हाथों में है”
- बहुराष्ट्रीय वायु सेना अभ्यास: “पिच ब्लैक 2026” (Exercise Pitch Black)
- “वन नेशन, वन Time”: व्हाइट रैबिट टेक्नोलॉजी पर आधारित IST नेटवर्क
- पीएम-नैप्स (उत्तर-पूर्वी क्षेत्र): कौशल विकास एवं प्रशिक्षुता विस्तार
- भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन: “नमो ग्रीन रेल” का वाणिज्यिक परिचालन
- 72वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार: विजेताओं एवं महत्वपूर्ण तथ्यों का विश्लेषण
- विक्रम-1 रॉकेट का सफल ऐतिहासिक प्रक्षेपण: “मिशन आगमन”
- कोडेक्स एलीमेंटेरियस कमीशन (CAC) का 49वां सत्र: भारतीय मसालों की वैश्विक गूंज
- यूएस फेडरल रिजर्व की उच्च-स्तरीय समीक्षा टास्क फोर्स: तीन भारतीय दिग्गजों की नियुक्ति
1. वार्षिक सांस्कृतिक उत्सव: श्रद्धा और उत्साह (मणिपुर, असम, ओडिशा, नागालैंड)
प्रस्तावना एवं वर्तमान परिदृश्य (Introduction & Current Scenario)
हाल ही में भारत के विभिन्न राज्यों में पारंपरिक और क्षेत्रीय वार्षिक उत्सव अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाए गए हैं। इनमें मणिपुर का ‘कांग चिंगबा’ उत्सव, असम का प्रसिद्ध ‘कामाख्या उत्सव/अंबुबाची मेला’, ओडिशा की विश्वप्रसिद्ध ‘जगन्नाथ रथ यात्रा’ और नागालैंड का ‘ऑरेंज फेस्टिवल’ प्रमुख हैं। ये उत्सव भारत की सांस्कृतिक विविधता, लोक-आस्था और कृषि-पर्यटन के जीवंत उदाहरण हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (Historical Background)
- जगन्नाथ रथ यात्रा (ओडिशा): इसका इतिहास अत्यंत प्राचीन है, जिसका उल्लेख स्कंद पुराण और ब्रह्म पुराण में मिलता है। यह यात्रा पुरी में भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की अपनी मौसी के घर (गुंडिचा मंदिर) की वार्षिक यात्रा का प्रतीक है।
- अंबुबाची मेला (असम): गुवाहाटी के नीलाचल पहाड़ियों पर स्थित कामाख्या देवी मंदिर में यह मेला सदियों से आयोजित हो रहा है। यह देवी कामाख्या के वार्षिक मासिक धर्म चक्र और पृथ्वी की उर्वरता का उत्सव है, जो प्राचीन तांत्रिक परंपराओं से जुड़ा है।
- कांग चिंगबा (मणिपुर): यह मणिपुर का रथ यात्रा उत्सव है जो 18वीं शताब्दी में राजा गंभीर सिंह के काल में वैष्णव धर्म के प्रभाव के बाद लोकप्रिय हुआ। यह पुरी की रथ यात्रा के समरूप ही मनाया जाता है।
- ऑरेंज फेस्टिवल (नागालैंड): यह नागालैंड के रुसोमा (Rüsoma) गाँव में आयोजित होने वाला एक आधुनिक सामाजिक-सांस्कृतिक और कृषि उत्सव है, जिसका उद्देश्य स्थानीय जैविक संतरा उत्पादकों को बढ़ावा देना और ग्रामीण पर्यटन विकसित करना है।
ऐतिहासिक और वर्तमान संदर्भ का जुड़ाव (Connecting Context)
प्राचीन काल से चले आ रहे ये धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव आज केवल आध्यात्मिक केंद्र नहीं रह गए हैं, बल्कि वे वर्तमान समय में ‘सॉफ्ट डिप्लोमेसी’ (Soft Diplomacy), पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था (Tourism Economy) और क्षेत्रीय एकता के बड़े माध्यम बन चुके हैं। वहीं दूसरी ओर, ऑरेंज फेस्टिवल जैसे आधुनिक उत्सव यह दर्शाते हैं कि कैसे सांस्कृतिक ढांचे का उपयोग करके वर्तमान समय में कृषि और आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया जा सकता है।
उत्सव विवरण तालिका
| उत्सव का नाम | संबंधित राज्य | मुख्य तथ्य / परीक्षा उपयोगी विवरण |
|---|---|---|
| कांग चिंगबा (Kang Chingba) | मणिपुर | मणिपुरी वैष्णव समुदाय द्वारा मनाया जाने वाला रथ यात्रा उत्सव। |
| अंबुबाची मेला / कामाख्या उत्सव | असम (गुवाहाटी) | नीलाचल पहाड़ी पर स्थित कामाख्या पीठ में जून/जुलाई में आयोजित तांत्रिक उत्सव। |
| जगन्नाथ रथ यात्रा | ओडिशा (पुरी) | तीन रथों (नंदीघोष, तालध्वज, देवदलन) की भव्य यात्रा, गुंडिचा मंदिर तक। |
| ऑरेंज फेस्टिवल (Orange Festival) | नागालैंड | जैविक कृषि, संतरा उत्पादन और ग्रामीण इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने वाला उत्सव। |
संभावित प्रश्न (Potential Exam Questions)
- MCQ: प्रसिद्ध ‘कांग चिंगबा’ उत्सव भारत के किस राज्य में पारंपरिक रूप से मनाया जाता है?
- A) असम
- B) मणिपुर
- C) ओडिशा
- D) नागालैंड
- उत्तर: B) मणिपुर
- मुख्य परीक्षा प्रश्न (Descriptive): “भारत के क्षेत्रीय त्योहार और मेले न केवल सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करते हैं बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।” इस कथन की विवेचना हाल ही में चर्चा में रहे उत्सवों के संदर्भ में कीजिए। (150 शब्द)
2. नेल्सन मंडेला अंतर्राष्ट्रीय दिवस 2026: “यह अभी भी हमारे हाथों में है”
प्रस्तावना एवं वर्तमान परिदृश्य
प्रत्येक वर्ष 18 जुलाई को वैश्विक स्तर पर ‘नेल्सन मंडेला अंतर्राष्ट्रीय दिवस’ (Nelson Mandela International Day) मनाया जाता है। वर्ष 2026 के लिए इस दिवस की आधिकारिक थीम “It is still in our hands” (यह अभी भी हमारे हाथों में है) घोषित की गई है। यह दिन दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति और रंगभेद विरोधी क्रांतिकारी नेल्सन मंडेला के मानवीय कार्यों, शांति, और स्वतंत्रता के संघर्ष को याद करने का अवसर है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
नेल्सन मंडेला ने दक्षिण अफ्रीका में क्रूर अश्वेत-विरोधी ‘रंगभेद शासन’ (Apartheid) के खिलाफ एक ऐतिहासिक और लंबा संघर्ष लड़ा। इस कारण उन्हें वर्ष 1964 में राजद्रोह के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। उन्होंने अपने जीवन के महत्वपूर्ण 27 वर्ष जेल (मुख्यतः रोबेन द्वीप) में बिताए। वैश्विक दबाव और आंतरिक संघर्ष के बाद उन्हें वर्ष 1990 में रिहा किया गया और 1994 में वे लोकतांत्रिक रूप से दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति चुने गए।
ऐतिहासिक और वर्तमान संदर्भ का जुड़ाव (India Link)
मंडेला का दर्शन महात्मा गांधी के अहिंसा और सत्याग्रह के सिद्धांतों से गहराई से प्रेरित था, यही कारण है कि उन्हें ‘दक्षिण अफ्रीका का गांधी’ भी कहा जाता है। भारत और मंडेला के ऐतिहासिक संबंधों को इस तथ्य से समझा जा सकता है कि भारत सरकार ने उन्हें जेल से रिहाई के वर्ष में ही, यानी 1990 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से नवाजा था। वह इस सम्मान को पाने वाले पहले पूर्ण गैर-नागरिक थे। इसके अतिरिक्त, पाकिस्तान ने भी उन्हें 1992 में अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘निशान-ए-पाकिस्तान’ से सम्मानित किया। वर्ष 1993 में उन्हें वैश्विक शांति के लिए ‘नोबेल शांति पुरस्कार’ दिया गया। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने आधिकारिक तौर पर नवंबर 2009 में इस दिवस की घोषणा की थी और पहला मंडेला दिवस 18 जुलाई 2010 को मनाया गया था।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तिथियां एवं पुरस्कार (Key Milestone Facts):
- 1964: उम्रकैद की सजा
- 1990: जेल से रिहाई और भारत सरकार द्वारा ‘भारत रत्न’ प्रदान किया गया।
- 1992: ‘निशान-ए-पाकिस्तान’ से सम्मानित
- 1993: नोबेल शांति पुरस्कार (Nobel Peace Prize) से सम्मानित।
- 2009/2010: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) द्वारा अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में मान्यता।
संभावित प्रश्न
- MCQ: नेल्सन मंडेला को भारत सरकार द्वारा किस वर्ष देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया था?
- A) 1993
- B) 1990
- C) 1994
- D) 2000
- उत्तर: B) 1990
3. बहुराष्ट्रीय वायु सेना अभ्यास “पिच ब्लैक 2026” (Exercise Pitch Black)
प्रस्तावना एवं वर्तमान परिदृश्य
भारतीय वायु सेना (IAF) ने ऑस्ट्रेलिया के उत्तरी क्षेत्र (Northern Australia) में आयोजित होने वाले बड़े पैमाने के बहुराष्ट्रीय हवाई युद्ध अभ्यास “पिच ब्लैक 2026” (Exercise Pitch Black 2026) में सफलतापूर्वक भाग लिया है। यह एक बहुराष्ट्रीय अभ्यास है जिसमें दुनिया भर की कई प्रमुख वायु सेनाएं जटिल हवाई परिचालन और युद्ध रणनीतियों का अभ्यास करने के लिए एकत्रित होती हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
अभ्यास पिच ब्लैक की शुरुआत वर्ष 1981 में रॉयल ऑस्ट्रेलियाई वायु सेना (RAAF) के विभिन्न स्क्वाड्रनों के बीच एक द्विपक्षीय वायु रक्षा अभ्यास के रूप में हुई थी। समय के साथ इसका विस्तार हुआ और यह एक बड़े बहुराष्ट्रीय अभ्यास में बदल गया। भारतीय वायु सेना ने पहली बार वर्ष 2018 में इस अभ्यास में भाग लेकर अपनी सामरिक उपस्थिति दर्ज कराई थी, जिसके बाद से भारत इसमें नियमित रूप से भागीदार रहा है।
भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा सहयोग एवं जुड़ाव (Indo-Australia Defence Ties)
वर्तमान में हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में रणनीतिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा संबंध बेहद मजबूत हुए हैं। दोनों देश ‘क्वाड’ (QUAD) सुरक्षा संवाद के भी सदस्य हैं। पिच ब्लैक जैसी बहुराष्ट्रीय गतिविधियां दोनों सेनाओं के बीच अंतःक्रियाशीलता (Interoperability) को बढ़ाती हैं।
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच अन्य प्रमुख सैन्य अभ्यास:
- AUSINDEX: दोनों देशों की नौसेनाओं (Navy) के बीच आयोजित होने वाला द्विपक्षीय अभ्यास।
- ऑस्ट्राहिन्द (AUSTRAHIND): दोनों देशों की थल सेनाओं (Army) के बीच होने वाला अभ्यास (AUSTRAHIND 2025 का आयोजन पर्थ, ऑस्ट्रेलिया में हुआ था)।
- मालाबार (Malabar): नौसैन्य अभ्यास, जिसमें भारत और ऑस्ट्रेलिया के साथ QUAD के अन्य सदस्य (अमेरिका और जापान) भी शामिल होते हैं।
संभावित प्रश्न
- MCQ: बहुराष्ट्रीय वायु सेना अभ्यास ‘पिच ब्लैक 2026’ का आयोजन किस देश की मेजबानी में किया गया?
- A) भारत
- B) संयुक्त राज्य अमेरिका
- C) ऑस्ट्रेलिया
- D) जापान
- उत्तर: C) ऑस्ट्रेलिया
4. “वन नेशन, वन Time” – व्हाइट रैबिट टेक्नोलॉजी पर आधारित IST नेटवर्क
प्रस्तावना एवं वर्तमान परिदृश्य
भारत ने डिजिटल संप्रभुता और सटीक समय मापन की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर पार किया है। केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रहलाद जोशी ने 16 जुलाई 2026 को क्षेत्रीय संदर्भ मानक प्रयोगशाला (RRSL), बेंगलुरु में “व्हाइट रैबिट टेक्नोलॉजी” (White Rabbit Technology) पर आधारित भारतीय मानक समय (IST) वितरण नेटवर्क का उद्घाटन किया। यह सरकार की महत्वाकांक्षी “वन नेशन, वन टाइम” (One Nation, One Time) पहल का हिस्सा है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
ऐतिहासिक रूप से, भारत में बैंकिंग, दूरसंचार, स्टॉक एक्सचेंज और पावर ग्रिड जैसी महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा प्रणालियां समय के सिंक्रोनाइजेशन (Synchronization) के लिए विदेशी उपग्रह प्रणालियों, मुख्य रूप से अमेरिकी जीपीएस (GPS) पर निर्भर रही हैं। साइबर सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह निर्भरता एक बड़ा जोखिम थी, क्योंकि युद्ध या तकनीकी खराबी की स्थिति में बाहरी प्रणालियों के बंद होने से देश का डिजिटल ढांचा ठप हो सकता था।
तकनीकी विशेषताएं और वर्तमान जुड़ाव (Technical Link & Advantages)
इस नई स्वदेशी प्रणाली के विकास के बाद अब विदेशी स्रोतों पर भारत की निर्भरता पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। व्हाइट रैबिट टेक्नोलॉजी एक उच्च-सटीक समय सिंक्रोनाइजेशन प्रणाली है जो सब-नैनोसेकंड (Sub-nanosecond) स्तर की सटीकता के साथ डिजिटल नेटवर्क पर समय वितरित करती है। यह समय UTC (NPLI) के साथ पूरी तरह से ट्रेसेबल है।
विकासकर्ता एवं प्रमुख हितधारक (Developers & Stakeholders):
यह नेटवर्क संयुक्त रूप से उपभोक्ता मामले विभाग, CSIR-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (CSIR-NPL) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा विकसित किया गया है। सत्यापन प्रक्रिया में SEBI, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE), और BSNL जैसे हितधारक भी शामिल रहे हैं।
प्रमुख लाभ: डिजिटल डेटा संरक्षण में वृद्धि, साइबर हमलों (Cyber Attacks) hardware और टाइम-स्पूफिंग से सुरक्षा, तथा वित्तीय बाजारों और पावर ग्रिडों की विश्वसनीयता में भारी सुधार।
संभावित प्रश्न
- MCQ: हाल ही में चर्चा में रही ‘व्हाइट रैबिट टेक्नोलॉजी’ (White Rabbit Technology) का संबंध निम्नलिखित में से किस क्षेत्र से है?
- A) साइबर सुरक्षा सॉफ्टवेयर
- B) अति-सटीक समय सिंक्रोनाइजेशन (IST नेटवर्क)
- C) क्वांटम कंप्यूटिंग चिप
- D) कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) रोबोटिक्स
- उत्तर: B) अति-सटीक समय सिंक्रोनाइजेशन (IST नेटवर्क)
- मुख्य परीक्षा प्रश्न (Descriptive): “डिजिटल समय संप्रभुता (Digital Time Sovereignty) किसी भी राष्ट्र के संवेदनशील डिजिटल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए अपरिहार्य है।” व्हाइट रैबिट टेक्नोलॉजी और ‘वन नेशन, वन टाइम’ पहल के आलोक में इस कथन का परीक्षण कीजिए। (250 शब्द)
5. पीएम-नैप्स (उत्तर-पूर्वी क्षेत्र): कौशल विकास एवं प्रशिक्षुता विस्तार
प्रस्तावना एवं वर्तमान परिदृश्य
कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) ने उत्तर-पूर्वी क्षेत्र (NER) के युवाओं के लिए रोजगार और कौशल के अवसरों को मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय प्रशिक्षुता संवर्धन योजना (PM-NAPS) के उत्तर-पूर्वी घटक को वित्त वर्ष 2026-27 तक बढ़ाने की महत्वपूर्ण घोषणा की है। इस विस्तारित योजना के क्रियान्वयन की देखरेख केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी कर रहे हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत सरकार द्वारा अगस्त 2016 में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय प्रशिक्षुता संवर्धन योजना (PM-NAPS) की शुरुआत की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य देश में प्रशिक्षुता (Apprenticeship) प्रशिक्षण को बढ़ावा देना और नियोक्ताओं को वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करके युवाओं को सीधे ऑन-जॉब ट्रेनिंग से जोड़ना था, ताकि शैक्षणिक ज्ञान और औद्योगिक आवश्यकताओं के बीच के अंतर को पाटा जा सके।
ऐतिहासिक और वर्तमान संदर्भ का जुड़ाव (Connecting Context)
उत्तर-पूर्वी क्षेत्र भौगोलिक रूप से दुर्गम और औद्योगिक रूप से मुख्य भूमि से कटा रहा है। इस ऐतिहासिक असंतुलन को दूर करने के लिए, सरकार ने विशेष रूप से पूर्वोत्तर के युवाओं के लिए पीएम-नैप्स के तहत वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 57.58 करोड़ रुपए का वित्तीय आवंटन किया है। इस विशेष बजटीय प्रावधान के माध्यम से पूर्वोत्तर के 30,000 (30K) से अधिक युवाओं को गुणवत्तापूर्ण औद्योगिक प्रशिक्षुता प्रदान की जाएगी, जिससे स्थानीय इकोसिस्टम मजबूत होगा।
संभावित प्रश्न
- MCQ: प्रधानमंत्री राष्ट्रीय प्रशिक्षुता संवर्धन योजना (PM-NAPS) का प्रारंभ किस वर्ष किया गया था?
- A) 2014
- B) 2016
- C) 2018
- D) 2020
- उत्तर: B) 2016
6. भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन: “नमो ग्रीन रेल” का वाणिज्यिक परिचालन
प्रस्तावना एवं वर्तमान परिदृश्य
भारतीय रेलवे ने हरित ऊर्जा और शून्य कार्बन उत्सर्जन की दिशा में एक युगांतकारी कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की पहली स्वदेशी रूप से विकसित हाइड्रोजन संचालित पैसेंजर ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जिसका नाम “नमो ग्रीन रेल” (NaMo Green Rail) रखा गया है। इस ट्रेन ने 19 जुलाई 2026 से हरियाणा के जींद-सोनीपत (Jind-Sonipat) के बीच 89 किलोमीटर लंबे रेल खंड पर अपना वाणिज्यिक परिचालन (Commercial Passenger Service) शुरू कर दिया है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
ऐतिहासिक रूप से भारतीय रेलवे कोयला (Steam), डीजल और फिर बिजली (Electric Grid) पर निर्भर रहा है। पर्यावरण संरक्षण को देखते हुए, वैश्विक स्तर पर वर्ष 2018 में जर्मनी ने दुनिया की पहली हाइड्रोजन संचालित कमर्शियल ट्रेन चलाई थी। भारत ने अपने ‘राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन’ (National Green Hydrogen Mission) के तहत रेलवे को 2030 तक शुद्ध-शून्य (Net-Zero) कार्बन उत्सर्जक बनने का लक्ष्य रखा है, जिसके तहत यह देश का पहला सफल तकनीकी-प्रदर्शन प्रोजेक्ट है।
तकनीकी विशेषताएं और वर्तमान जुड़ाव (Technical Specs & Features)
इस ट्रेन का डिजाइन और निर्माण पूरी तरह से भारत में इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF), चेन्नई द्वारा किया गया है, जबकि तकनीकी विशिष्टताएं अनुसंधान, डिजाइन और मानक संगठन (RDSO) द्वारा तैयार की गई हैं। यह ट्रेन ‘प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन’ (Proton Exchange Membrane) फ्यूल सेल तकनीक पर काम करती है, जिसमें ऑनबोर्ड संग्रहीत हाइड्रोजन हवा की ऑक्सीजन के साथ इलेक्ट्रोकेमिकल प्रक्रिया से बिजली पैदा करती है। इस प्रक्रिया का एकमात्र सह-उत्पाद केवल जल वाष्प (Water Vapour) और ऊष्मा है, यानी कोई धुआं या कार्बन उत्सर्जन नहीं होता।
महत्वपूर्ण परीक्षा तथ्य (Key Technical Data):
- रूट: जींद-सोनीपत रेल खंड, हरियाणा (दूरी: 89 किमी, समय: 2 घंटे, स्टॉपेज: 12 स्टेशन)।
- संरचना: 10-कोच का ट्रेनसेट (2 हाइड्रोजन ड्राइविंग पावर कार और 8 ट्रेलर कोच)। कुल क्षमता लगभग 2,600 यात्री।
- सुरक्षा मंजूरी: पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) और TÜV SÜD, जर्मनी द्वारा प्रमाणित।
- अतिरिक्त तथ्य (रेलवे रिकॉर्ड): हाल ही में भारतीय रेल की सबसे लंबी मालगाड़ी ‘रुद्रास्त्र’ (Rudrastra) का संचालन गजरख्याजा से गढ़वा तक सफलतापूर्वक किया गया था।
संभावित प्रश्न
- MCQ: भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन संचालित ट्रेन “नमो ग्रीन रेल” का वाणिज्यिक संचालन किन दो स्टेशनों के बीच शुरू हुआ है?
- A) दिल्ली और मेरठ
- B) जींद और सोनीपत
- C) मुंबई और पुणे
- D) बेंगलुरु और मैसूर
- उत्तर: B) जींद और सोनीपत
7. 72वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार: विजेताओं एवं महत्वपूर्ण तथ्यों का विश्लेषण
प्रस्तावना एवं वर्तमान परिदृश्य
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा नई दिल्ली में वर्ष 2024 की फिल्मों के लिए 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों (72nd National Film Awards) की घोषणा कर दी गई है। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार देश का सबसे प्रतिष्ठित सिनेमाई सम्मान है, जो कलात्मक, तकनीकी और सामाजिक रूप से प्रासंगिक उत्कृष्ट फिल्मों को दिया जाता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की स्थापना वर्ष 1954 में ‘स्टेट अवार्ड्स फॉर फिल्म्स’ (State Awards for Films) के रूप में की गई थी, जिसका उद्देश्य भारतीय कला और संस्कृति को बढ़ावा देना था। शुरुआत में यह बहुत ही सीमित श्रेणियों में दिया जाता था, परंतु समय के साथ इसमें फीचर फिल्म, गैर-फीचर फिल्म और सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ लेखन जैसी श्रेणियां जोड़ी गईं। वर्तमान में यह पुरस्कार सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत फिल्म समारोह निदेशालय द्वारा प्रशासित किया जाता है।
विजेताओं की सूची और परीक्षा उपयोगी तथ्य (Winners & Facts)
इस वर्ष के पुरस्कारों में मुख्यधारा की सामाजिक-राजनीतिक और जीवनी आधारित फिल्मों का दबदबा रहा। फीचर फिल्म जूरी के अध्यक्ष प्रसिद्ध फिल्म निर्माता जयराज थे, जबकि गैर-फीचर फिल्म जूरी के अध्यक्ष आसिम कुमार सिन्हा थे। विजेताओं का विवरण नीचे दी गई तालिका में है:
पुरस्कार श्रेणी (Category) विजेता (Winner) फिल्म (Film) सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म (Best Feature Film) आर्टिकल 370 (Article 370) आर्टिकल 370 सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (Best Actor) ममूटी (Mammootty) कार्तिक आर्यन (Kartik Aaryan) भ्रमयुगम (Bramayugam) चंदू चैंपियन (Chandu Champion) सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री (Best Actress) यामी गौतम (Yami Gautam) आर्टिकल 370 सर्वश्रेष्ठ निर्देशक – फीचर (Best Director) राजकुमार पेरियासामी (Rajkumar Periasamy) अमरन (Amaran) सर्वश्रेष्ठ निर्देशक – नॉन-फीचर आनंद एल. राय (Anand L. Rai) स्टैच्यू ऑफ यूनिटी सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म (Best Hindi Film) श्रीकांत (Srikanth) श्रीकांत संभावित प्रश्न
- MCQ: 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में किस फिल्म को ‘सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म’ का पुरस्कार प्रदान किया गया है?
- A) चंदू चैंपियन
- B) श्रीकांत
- C) आर्टिकल 370
- D) अमरन
- उत्तर: C) आर्टिकल 370
8. विक्रम-1 रॉकेट का सफल ऐतिहासिक प्रक्षेपण: “मिशन आगमन”
प्रस्तावना एवं वर्तमान परिदृश्य
18 जुलाई 2026 को भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र ने एक अभूतपूर्व स्वर्णिम इतिहास रचा है। हैदराबाद स्थित निजी अंतरिक्ष स्टार्टअप स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) ने अपने पहले कक्षीय प्रक्षेपण यान (Orbital Launch Vehicle) “विक्रम-1” (Vikram-1) का सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा के प्रथम लॉन्च पैड से सफल प्रक्षेपण किया। इस ऐतिहासिक उद्घाटन उड़ान को “मिशन आगमन” (Mission Aagaman) नाम दिया गया था।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
ऐतिहासिक रूप से भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम पूरी तरह सरकारी संस्था इसरो (ISRO) के नियंत्रण में था। वर्ष 2020 में केंद्र सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र में बड़े सुधारों की घोषणा करते हुए इसे निजी कंपनियों के लिए खोल दिया और ‘इन-स्पेस’ (IN-SPACe) नियामक संस्था बनाई। स्काईरूट एयरोस्पेस ने नवंबर 2022 में भारत का पहला निजी सब-ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-एस’ लॉन्च किया था। अब ‘विक्रम-1’ का सफल प्रक्षेपण भारत का पहला सफल निजी कक्षीय (Orbital) प्रक्षेपण है। इसके साथ ही भारत दुनिया का तीसरा ऐसा देश बन गया है (अमेरिका और चीन के बाद), जहां किसी निजी कंपनी ने स्वतंत्र रूप से कक्षीय रॉकेट विकसित कर अंतरिक्ष में उपग्रह स्थापित किए हैं।
तकनीकी विशेषताएं और परीक्षा उपयोगी विवरण (Technical Details)
विक्रम-1 रॉकेट पूरी तरह से अत्याधुनिक ऑल-कार्बन-कंपोजिट संरचना (All-Carbon-Composite Structure) से बना है। यह एक बहु-चरणीय रॉकेट है जिसके प्रथम तीन चरण ठोस ईंधन (Solid Fuel) इंजन तकनीक पर आधारित हैं और इसमें 3D-प्रिंटेड लिक्विड इंजन पुर्जों का भी उपयोग हुआ है। रॉकेट ने उपग्रहों को पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit – LEO) में लगभग 450 किमी की ऊंचाई पर सफलतापूर्वक स्थापित किया।
विक्रम-1 के प्रमुख विनिर्देश (Key Specifications):
- ठोस ईंधन चरण संरचना: प्रथम चरण: ‘कलम 1200’ (Kalam 1200), द्वितीय चरण: ‘कलम 1250’ (Kalam 1250), तृतीय चरण: ‘कलम 100’ (Kalam 100)।
- पेलोड क्षमता: 350 किलोग्राम (350 kg) तक के छोटे उपग्रहों को LEO में ले जाने में सक्षम।
- स्थापित उपग्रह: इस मिशन के माध्यम से तीन लघु उपग्रह (Slope, Solars-S3, और Imbres) स्थापित किए गए।
- विशेष सम्मान: इस रॉकेट के भीतर भारत के तीन महान वैज्ञानिकों—डॉ. विक्रम साराभाई, सी.वी. रमन, और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की लघु प्रतिमाएं/श्रद्धांजलि ले जाई गईं, साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक लिखित संदेश भी अंकित था।
संभावित प्रश्न
- MCQ: भारत के पहले निजी कक्षीय रॉकेट ‘विक्रम-1’ के पहले सफल प्रक्षेपण मिशन को क्या नाम दिया गया था?
- A) मिशन प्रारंभ
- B) मिशन आगमन
- C) मिशन उड़ान
- D) मिशन स्काई
- उत्तर: B) मिशन आगमन
- मुख्य परीक्षा प्रश्न (Descriptive): “अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी के प्रवेश ने भारत को वैश्विक वाणिज्यिक अंतरिक्ष बाजार (Global Commercial Space Market) में एक प्रतिस्पर्धी शक्ति के रूप में स्थापित कर दिया है।” स्काईरूट एयरोस्पेस के ‘मिशन आगमन’ के संदर्भ में इस कथन का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)
9. कोडेक्स एलीमेंटेरियस कमीशन (CAC) का 49वां सत्र: भारतीय मसालों की वैश्विक गूंज
प्रस्तावना एवं वर्तमान परिदृश्य
जेनेवा, स्विट्जरलैंड में आयोजित कोडेक्स एलीमेंटेरियस कमीशन (Codex Alimentarius Commission – CAC) के 49वें सत्र में भारत ने अंतर्राष्ट्रीय खाद्य मानक निर्धारण में एक बहुत बड़ी कूटनीतिक और व्यापारिक सफलता प्राप्त की है। भारत के नेतृत्व और सह-अध्यक्षता में तैयार किए गए तीन प्रमुख मसालों—बड़ी इलायची (Large Cardamom), धनिया (Coriander), और वैनिला (Vanilla) के लिए एकीकृत वैश्विक गुणवत्ता मानकों को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
कोडेक्स एलीमेंटेरियस कमीशन (CAC) की स्थापना वर्ष 1963 में संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा संयुक्त रूप से की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा करना और वैश्विक खाद्य व्यापार में निष्पक्ष प्रथाओं को सुनिश्चित करना है। भारत वर्ष 1964 में इसका सदस्य बना था। भारत वर्ष 2014 में अपनी स्थापना के समय से ही ‘कोडेक्स कमेटी ऑन स्पाइसेस एंड कुलिनरी हर्ब्स’ (CCSCH) की अध्यक्षता कर रहा है, जिसका सचिवालय ‘भारतीय मसाला बोर्ड’ (Spices Board of India) है।
व्यापारिक महत्व एवं जुड़ाव (Trade Significance)
यह मंजूरी भारत के लिए इसलिए गेम-चेंजर है क्योंकि भारत दुनिया में मसालों का सबसे बड़ा उत्पादक, उपभोक्ता और निर्यातक है। बड़ी इलायची मुख्य रूप से उत्तर-पूर्वी हिमालाई क्षेत्र (सिक्किम और दार्जिलिंग) की एक स्वदेशी फसल है, जिसके लिए वैश्विक मानक बनने से स्थानीय किसानों को भारी लाभ होगा। विश्व व्यापार संगठन (WTO) कोडेक्स मानकों को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार विवादों के निपटारे के लिए संदर्भ मानक मानता है। अतः यदि भारतीय मसाले इन मानकों को पूरा करते हैं, तो कोई भी देश इन्हें बिना वैज्ञानिक साक्ष्य के ‘असुरक्षित’ कहकर खारिज नहीं कर सकता, जिससे भारतीय निर्यात गैर-टैरिफ बाधाओं (Non-Tariff Barriers) से सुरक्षित हो जाएगा।
संभावित प्रश्न
- MCQ: हाल ही में जेनेवा में आयोजित कोडेक्स एलीमेंटेरियस कमीशन (CAC) के 49वें सत्र में निम्नलिखित में से किस मसालों के लिए भारत-नेतृत्व वाले वैश्विक मानकों को अपनाया गया?
- A) काली मिर्च, जीरा, हल्दी
- B) बड़ी इलायची, धनिया, वैनिला
- C) सोंठ, मेथी, दालचीनी
- D) लौंग, जायफल, इलायची
- उत्तर: B) बड़ी इलायची, धनिया, वैनिला
10. यूएस फेडरल रिजर्व की उच्च-स्तरीय समीक्षा टास्क फोर्स: तीन भारतीय दिग्गजों की नियुक्ति
प्रस्तावना एवं वर्तमान परिदृश्य
संयुक्त राज्य अमेरिका के केंद्रीय बैंक, यूएस फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) के नवनियुक्त अध्यक्ष केविन वॉश (Kevin Warsh) ने अपनी मौद्रिक नीति ढांचे और बैलेंस शीट संचालन की व्यापक समीक्षा के लिए पांच स्वतंत्र, उच्च-स्तरीय टास्क फोर्स (Task Forces) के गठन की घोषणा की है। इस वैश्विक वित्तीय पुनर्गठन प्रक्रिया में भारत के लिए अत्यंत गौरव का विषय यह है कि इन टास्क फोर्स में भारतीय मूल के तीन विश्व प्रसिद्ध विशेषज्ञों को नियुक्त किया गया है, जिनमें भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर डॉ. रघुराम राजन (Dr. Raghuram Rajan) प्रमुख हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
यूएस फेडरल रिजर्व की स्थापना वर्ष 1913 में हुई थी, जो दुनिया की सबसे शक्तिशाली वित्तीय संस्थाओं में से एक है। कोविड-19 महामारी के दौरान अमेरिकी अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए फेडरल रिजर्व ने बड़े पैमाने पर संपत्ति खरीद (Quantitative Easing) के माध्यम से अपनी बैलेंस शीट को रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ाकर लगभग $9 ट्रिलियन (9 लाख करोड़ डॉलर) कर दिया था। इसके बाद अमेरिका में पिछले पांच वर्षों से मुद्रास्फीति (Inflation) अपने दीर्घकालिक लक्ष्य 2% से ऊपर बनी हुई है। इस असाधारण ऐतिहासिक स्थिति और आर्थिक बदलावों का विश्लेषण करने के लिए ही इस समीक्षा पैनल की आवश्यकता पड़ी है।
भारतीय दिग्गजों की भूमिका और जुड़ाव (Role of Indian Experts)
यह वैश्विक नीति-निर्माण में भारतीय बौद्धिक क्षमता के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है। तीनों नियुक्त सदस्यों की भूमिका निम्नलिखित है:
- डॉ. रघुराम राजन (Raghuram Rajan): इन्हें ‘बैलेंस शीट पॉलिसी टास्क फोर्स’ (Balance Sheet Policy Task Force) का सदस्य नियुक्त किया गया है। यह पैनल फेडरल रिजर्व की विशाल संपत्ति होल्डिंग्स के आकार, संरचना और मौद्रिक नीति पर इसके संस्थागत प्रभावों का गहन विश्लेषण करेगा। (नोट: डॉ. राजन 2013-16 तक RBI के गवर्नर और IMF के मुख्य अर्थशास्त्री रह चुके हैं)।
- डॉ. राज चेट्टी (Raj Chetty): हार्वर्ड विश्वविद्यालय के इस प्रसिद्ध अर्थशास्त्री को ‘डेटा टास्क फोर्स’ (Data Task Force) का सह-प्रमुख बनाया गया है, जो मौद्रिक निर्णयों में उपयोग किए जाने वाले वास्तविक आर्थिक संकेतकों की गुणवत्ता और समयबद्धता में सुधार पर ध्यान केंद्रित करेगा।
- आशा शर्मा (Asha Sharma): माइक्रोसॉफ्ट की कार्यकारी उपाध्यक्ष और एक्सबॉक्स (Xbox) की सीईओ आशा शर्मा को ‘उत्पादकता और रोजगार टास्क फोर्स’ (Productivity and Jobs Task Force) में शामिल किया गया है, जो यह विश्लेषण करेगी कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी उभरती प्रौद्योगिकियां भविष्य में उत्पादकता और दीर्घकालिक आर्थिक विकास को कैसे प्रभावित करेंगी।
संभावित प्रश्न
- MCQ: हाल ही में यूएस फेडरल रिजर्व द्वारा गठित ‘बैलेंस शीट पॉलिसी टास्क फोर्स’ में किस पूर्व भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है?
- A) डॉ. उर्जित पटेल
- B) डॉ. रघुराम राजन
- C) डॉ. वाई. वी. रेड्डी
- D) श्री शक्तिकांत दास
- उत्तर: B) डॉ. रघुराम राजन
- मुख्य परीक्षा प्रश्न (Descriptive): वैश्विक वित्तीय नियामकों और नीति-निर्माण निकायों में भारतीय मूल के विशेषज्ञों की बढ़ती भागीदारी के रणनीतिक और बौद्धिक महत्व का मूल्यांकन कीजिए। (150 शब्द)

